📕 धारा 290 का पूरा टेक्स्ट (Bare Act):-
(किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण)
जो कोई किसी निर्माण को गिराने, या उसकी मरम्मत करने में या संनिर्माण करने उस निर्माण के ऐसे उपाय करने का, जो उस निर्माण के या उसके किसी भाग के गिरने से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
🛑 Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) का परिचय :-
भारतीय आपराधिक कानून 2024 में IPC (भारतीय दण्ड संहिता) की जगह Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) लाई गई है। इसका उद्देश्य पुराने कानूनों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखना है। BNS के तहत कई नई धारणाएँ और संशोधित प्रावधान शामिल हैं, जिनमें से एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है धारा 290।
⚓ धारा 290 – क्या कहती है ?:-
BNS की धारा 290 कहती है कि:- यदि कोई व्यक्ति किसी भी इमारत को गिराने, मरम्मत करने या नया निर्माण करते समय पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं करता ताकि इमारत या उसके किसी हिस्से के गिरने से मानव जीवन को खतरा न हो, तो वह अपराध करता है। ऐसे व्यक्ति को छह महीने तक की कारावास, या ₹5,000 तक का जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
इसका मुख्य ध्यान निर्माण, मरम्मत और ध्वस्तीकरण (demolition) के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना है ताकि आसपास रहने वाले लोग सुरक्षित रहें।
🤟 आसान भाषा में समझें:-
कोई व्यक्ति भवन या उसके हिस्से को गिराने/मरम्मत करने/निर्माण करने के दौरान लापरवाही करता है,
या सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज़ करता है,
जिसके कारण आसपास के लोगों के जीवन को खतरा हो सकता है।
यह कानून ‘इरादे’ (intent) की बजाय लापरवाही (negligence) पर केन्द्रित है। इसका मतलब है कि जानबूझकर या अनजाने में सुरक्षा उपाय न करने से भी यह धारा लागू हो सकती है यदि किसी के जीवन को खतरा हो।
🪶 धारा 290 का उद्देश्य:-
इस कानून का मुख्य उद्देश्य है:-
सार्वजनिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना,
निर्माण, मरम्मत और ध्वस्तीकरण कार्यों में सुरक्षा उपायों का पालन करवाना,
लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं और हानि को रोकना।
⚖️ दंड और परिणाम:-
सजा:- 6 मास के लिए कारावास, या 5,000 रुपए का जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।
इन दंडों का मकसद जोखिम भरे निर्माण कार्यों में सावधानी न बरतने वालों को रोकना और समाज को सुरक्षा प्रदान करना है।
✍️ धारा 290 किस पर लागू होती है? :-
यह धारा उन व्यक्तियों/कर्मचारियों/ठेकेदारों पर लागू होती है जो किसी भवन के निर्माण, मरम्मत या ध्वस्तीकरण के काम में शामिल हैं और पर्याप्त सुरक्षा उपायों को नहीं अपनाते। इससे सिर्फ कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि आम जनता भी जोखिम में आ सकती है
🙇 निष्कर्ष:-
BNS की धारा 290 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो निर्माण से जुड़ी लापरवाही को गंभीरता से लेती है और सुरक्षा के आवश्यक उपायों को कानूनी मजबूरी बनाती है। इसका लक्ष्य है मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और निर्माण-कार्य से उत्पन्न संभावित खतरों को रोकना।
(IPC) की धारा 288 को (BNS) की धारा 290 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

